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महिलाओं को नया संदेश -आत्मनिर्भर व सशक्त व शिक्षित: रेणु रेलवे गार्ड बनकर दिखा रही हरी झंडी, ममता पायलट बन दौड़ा रही ट्रेन

बांदीकुई जज्बा और कुछ नया करने का हौंसला हो तो बुलंदी छूना आसान हो जाता है। बांदीकुई रेलवे में तैनात जयपुर डिवीजन की पहली महिला गार्ड बनकर रेणु जोनवाल ने महिलाओं को नया संदेश दिया। ट्रेन में 12 घंटे गार्ड की नौकरी करने के साथ ये अपने परिवार को भी पूरा टाइम दे रही हैं। शहर के वार्ड 11 भगत सिंह कालोनी निवासी 28 वर्षीय रेलवे में गार्ड पद पर तैनात रेणु जोनवाल ने बताया कि उनके पिता रामप्रसाद जोनवाल रेलवे में कैरिज विभाग में कार्यरत थे। उनकी मौत के बाद रेलवे में ग्रुप डी में अनुकंपा नियुक्ति मिली। इसके बाद उन्होंने विभागीय परीक्षा देकर गार्ड बन गई। वर्ष 2019 में उन्हें गार्ड पद पर पोस्टिंग मिली। इसके बाद वे लगातार गुड्स ट्रेन गार्ड के रूप में मालगाडियों का संचालन कर रही है। अभी वह बांदीकुई में तैनात है। रेणु जोनवाल ने बताया कि उनके दो बच्चे है। पति प्राइवेट नौकरी के कारण बाहर रहते हैं। ट्रेन संचालन के दौरान उन्हें बाहर जाना पड़ता है और कम से कम 12 घंटे की ड्यूटी लौटना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की सार संभाल के लिए एक आया लगा रखी है।
गार्ड का लास्ट डिब्बा, जंगल में ट्रेन रुकने पर भी नहीं घबराती रेणु ने बताया कि वे जब ग्रुप डी में थी तो उस समय जयपुर डिवीजन में सिर्फ पुरुष ही ट्रेन गार्ड होते थे। एक भी महिला गार्ड नहीं थी। ऐसे में उन्होंने विभागीय परीक्षा में गार्ड की नौकरी का एग्जाम दिया और जयपुर डिवीजन की पहली महिला गार्ड बनी। रेणु जोनवाल ने बताया कि ट्रेन में गार्ड का डिब्बा सबसे लास्ट में रहता है। कई बार ट्रेन के जंगल में खड़े हो जाने पर उन्हें हालांकि असुरक्षा का भय रहता है। लेकिन वे हिम्मत नहीं हारती। इतना ही नहीं कई बार ट्रेन में खराबी आने पर नीचे उतरकर ठीक करने भी जाना पड़ता है।
पहले ही चांस में परीक्षा पास कर ममता बन गई लोको पायलट बांदीकुई लोको में तैनात 25 वर्षीय सहायक लोको पायलट ममता कुमारी मीणा बचपन में जब ट्रेन देखती थी उनके मन भी ट्रेन दौड़ाने की तमन्ना थी। इसी तमन्ना ने उन्हें रेलवे में सहायक लोको पायलट के पद पर पहुंचा दिया। ममता ने बताया कि वे जयपुर जिले के बस्सी के चतरपुरा गांव की रहने वाली हैं। पिता खेतीबाड़ी का काम करते हैं और मां ग्रहणी है। हम दो बहने हैं। बड़ी टीचर की तैयारी कर रही है। मैंने वर्ष 2019 में पहले ही चांस में सहायक लोको पायलट की परीक्षा पास कर ली और वे अब बांदीकुई लोको में तैनात है। बांदीकुई से ट्रेन लेकर रेवाड़ी व फुलेरा तक जाती है।

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