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सनाी देओल नहीं ये शख्स था ‘Gadar’ का असल ‘तारा सिंह’, कभी पूरी नहीं हो सकी प्रेम कहानी, ट्रेन के आगे कूदकर दी जान

‘गदर: एक प्रेम कथा’ एक रियल लाइफ स्टोरी से इंस्पायर्ड है। सनी देओल और अमीषा ने दो
असल लोगों का किरदार फिल्म में निभाया है, जिस शख्स पर ये फिल्म आधारित है उनका
नाम है बूटा सिंह। कौन हैं बूटा सिंह, क्या करते थे और क्या थी उनकी प्रेम कहानी जानने के
लिए पढ़े पूरी खबर।
गदर- एक प्रेम कथा।

‘गदर: एक प्रेम कथा’ को रिलीज हुए भले ही 22 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी ये फिल्म
लोगों की आंखों में आंसू ला देती है। ‘गदर’ री-रिलीज के बाद सिनेमाघरों में धमाल मचा दी।
हाल ही में तारा सिंह और सकीना की आगे की कहानी ‘गदर 2’ के टीजर में नजर आई। अब
‘गदर 2’ के फैंस से और इंतजार नहीं हो रहा है। इसी बीच एक बार फिर सरदार बूटा सिंह चर्चा
में आ गए हैं। फैंस जानना चाहते हैं कि आखिर कौन हैं बूटा सिंह, जिनके ऊपर फिल्म ‘गदर’
फिल्माई कई है? बूटा सिंह की कहानी काफी दर्दनाक और इंस्पायरिंग है।

असल शख्स की कहानी पर बेस्ड है ‘गदर’

वैसे क्या आप जानते हैं कि ‘गदर-एक प्रेम कथा’ एक असल शख्स की कहानी से इंस्पायर्ड थी।
ये फिल्म एक सच्चाई प्रेम कहानी को दिखाती है। आज हम आपको उस बूटा सिंह के बारे में
बताएंगे, जिसने हिंदुस्तान से लेकर पाकिस्तान तक को अपने प्यार की ताकत से हिला दिया
था। फिल्म में दिखाया गया सरदार का किरदार, जिसे सनी देओल ने निभाया वो बूटा सिंह की
लाइफ से इंस्पायर्ड था। वहीं अमीषा ने जिस मुस्लिम लड़की का किरदार निभाया वो जैनब नमा
की लड़की से इंस्पायर्ड था।

ब्रिटिश सेना में सिपाही थे बूटा सिंह

दरअसल, बूटा सिंह ब्रिटिश सेना में सिपाही थे। 1947 के बंटवारे के वक्त जब दंगे भड़के तो
जैनब नाम की लड़की फंस गई थी, जिसकी बूटा सिंह ने जान बचाई थी। बूटा सिंह ने इस
लड़की को सहारा दिया और बाद में दोनों को प्यार हुआ और शादी कर ली। दोनों को एक बेटी
भी हुई, लेकिन काफी अच्छा वक्त बिताने के बाद दोनों को अलग होना पड़ा। काफी वक्त बाद
बूटा सिंह ने जैनब को उनके परिवार से मिलने पाकिस्तान जाने दिया, लेकिन उन्हें इस बात का
जरा भी अहसास न था कि वहां से उनकी वापसी नहीं हो पाएगी। जैनब के घर वालों ने उनकी
शादी तुड़वाकर चचेरे भाई से करा दी। ये सब पारिवारिक दबाव में हुआ।

बूटा को नहीं मिला उनका प्यार

बूटा सिंह गैरकानूनी तरीके से पाकिस्तान पहुंच गए। उनके पाकिस्तान पहुंचने के बाद भी उनका
जैनब से कई संपर्क नहीं हो सका। इसी बीच बूटा सिंह को पकड़ लिया गया। उनपर गैरकानूनी
तरीके से पाकिस्तान में घुसने का आरोप लगा। कोर्ट में जब उनकी पेशी हुई तो उन्होंने नम
आंखों के साथ बताया कि उनकी पत्नी और बेटी भी हैं। कोर्ट में जैनब ने शादी की बात से
इंकार कर दिया। जैनब की बात सुनकर वो बुरी तरह टूट गए। इसके बाद बूटा ने 1957 में ट्रेन
के आगे बेटी के साथ कूदकर जान देने का प्रयास किया, जिसमें उनकी जान चली गई, लेकिन
बेटी बच गई। बूटा की इच्छा थी कि उन्हें पत्नी के गांव नूरपुर में दफनाया जाए, इसकी
अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद मिआनी साहिब में उन्हें दफनाया गया। ये जगह अब युवा
प्रेमियों के लिए तीर्थस्थल है।

बनीं है कई और फिल्में

‘गदर’ की कहानी इससे थोड़ा अलग है। बूटा सिंह की कहानी पर कई और फिल्में भी बनीं,
जिसमें 2007 की कनाडाई फ़िल्म, ‘पार्टिशन’ और 2004 की बॉलीवुड फिल्म ‘वीर ज़ारा’
भी शामिल हैं। इसके अलावा उनकी कहानी पर एक नॉवल भी लिखी गई है, जिसका नाम
‘मुहब्बत’ है। इसे इशरत रहमानी ने लिखा है।

‘गदर’ फिल्म की कहानी

‘गदर’ की बात करें तो यह फिल्म भारत पाकिस्तान बंटवारे और हिंदुस्तान की आजादी से समय
की कहानी है। जिसमें दो अलग-अलग धर्म के पति-पत्नी तारा सिंह और सकीना बंटवारे में जुदा
हो जाते हैं। जिसके बाद तारा सिंह अपने बेटे को लेकर पाकिस्तान अपनी पत्नी को लेने जाता है
और मोहब्बत की ताकत से पूरे पाकिस्तान को हिला डालता है। फिल्म मेकर्स ने ‘गदर 2’ की
रिलीज से पहले फैंस को ‘गदर’ दिखाकर ये पूरी कहानी दोबारा याद दिला दी है, ताकि वो आगे
की कहानी से रिलेट कर सकें।

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