ठंड से राहत लेकिन उत्तर&पश्चिम भारत में फिर होगी बारिश 

नई दिल्ली। उत्तर-पश्चिम भारत में इस समय मौसम सुहावना बना हुआ है। अच्छी धूप के बीच हल्की ठंडी हवाओं ने ठंड के असर को कम कर दिया है। तापमान में बढ़ोतरी से लोगों को सर्दी के सख्त मौसम से राहत मिली है। हालांकि, यह राहत ज्यादा दिन तक नहीं टिकेगी, क्योंकि एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। 
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, आज उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान बढ़ सकता है। वहीं, हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। तमिलनाडु में भी हल्की बारिश के आसार हैं। इसी बीच कल 22 जनवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय पहुंचेगा, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। बारिश का असर 23 जनवरी को बढ़़ने के आसार हैं। इसके तहत दिल्ली, पश्चिमी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। 
इस बारिश से दिन के अधिकतम तापमान में गिरावट आएगी, जिससे हाल के असामान्य गर्म मौसम से राहत मिलेगी। हालांकि, 24 जनवरी के बाद न्यूनतम तापमान में फिर से गिरावट हो सकती है और ठंड का प्रभाव लौटने की संभावना है।

किसानों के लिए राहत 
22 और 23 जनवरी की बारिश उत्तर-पश्चिम भारत के किसानों और निवासियों को राहत देगी, हालांकि यह बारिश जल संकट को पूरी तरह हल नहीं कर सकेगी। 24 जनवरी के बाद एक सप्ताह तक शुष्क मौसम का अनुमान है, जिससे ठंड का प्रभाव फिर से बढ़ सकता है। यह बारिश अस्थायी राहत तो देगी लेकिन क्षेत्र में जल संतुलन को बेहतर करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। मौसम विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और शुष्क हालात पर नजर बनाए रखें।

  • Related Posts

    अमृतसर में तीस किलो हेरोइन बरामद, एक गिरफ्तार

    पंजाब में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने सीमा पार से तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एक ड्रग तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से एक कार के…

    भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और थाईलैंड की ‘एक्ट वेस्ट’ नीति पारस्परिक समृद्धि को बढ़ावा देती हैं: मोदी

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और थाईलैंड के बीच कई क्षेत्रों में जीवंत साझेदारी पर जोर देते हुए कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और थाईलैंड की ‘एक्ट वेस्ट’…