“मैं लड़की हूं, मैं बदलाव की राह हूं” — सरोकार व टेक्नो इंडिया स्कूल में बालिकाओं ने मनाया आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का पर्व

भोपाल। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर शनिवार को सरोकार ग्रुप और टेक्नो इंडिया ग्रुप पब्लिक स्कूल द्वारा विद्यालय सभागार में एक प्रेरणादायक और रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की वैश्विक थीम — ‘मैं लड़की हूं, मैं बदलाव की राह हूं और संकट की घड़ी में सबसे आगे हूं’ — को केंद्र में रखकर आयोजित इस समारोह में बालिकाओं ने अपने नाटक, नृत्य और पोस्टर के माध्यम से यह सशक्त संदेश दिया कि वे केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की परिवर्तनकारी शक्ति हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। सभागार तालियों से गूंज उठा जब मंच पर बतौर मुख्य अतिथि भोपाल की पहली महिला बाइक राइडर सुश्री शहला आरिज़ पहुंचीं। तीन बच्चों की मां और 40 वर्षीय शहला आरिज़ ने अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए छात्राओं से कहा—

“अगर मैं बाइक राइडर बन सकती हूं, तो कोई भी लड़की अपने सपनों को साकार कर सकती है। लड़कियों को अब किसी सीमा में बंधने की ज़रूरत नहीं है। वे भी बदलाव ला सकती हैं और समाज को नई दिशा दे सकती हैं।”

उन्होंने छात्राओं से यह भी कहा कि सपनों को पाने के लिए आत्मविश्वास सबसे बड़ा हथियार है—बस डर को हराना सीखो, रास्ते खुद बनते जाएंगे।

सामाजिक संस्था सरोकार ग्रुप की सचिव सुश्री कुमुद सिंह ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आत्मबोध और जागरूकता का संदेश देना है।

“आज की लड़की को अपने अधिकार जानने होंगे, शिक्षा के साथ अपने भीतर के हुनर को निखारना होगा। आत्मनिर्भर बनना ही असली सशक्तिकरण है। साथ ही, समाज के बालकों की भी जिम्मेदारी है कि वे लड़कियों के इस सफर में सच्चे साथी बनें।”

विद्यालय की प्राचार्य सुश्री ज़ेबा खान ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा—

“आज आप मेहनत और लगन से जो कुछ भी करेंगे, वही कल आपकी पहचान बनेगा। आप भी हमारे अतिथियों की तरह समाज में रोल मॉडल बन सकते हैं।”

समारोह के दौरान छात्राओं ने बालिकाओं के जीवन में आने वाली चुनौतियों और उनके संघर्षों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति और सांस्कृतिक नृत्य से उपस्थित सभी का मन मोह लिया। नाटक का निर्देशन सुश्री योग्यता ने किया, जबकि संचालन सुश्री ऋषि रावत ने किया।

डेज़ी त्रिवेदी द्वारा बनाए गए पोस्टरों ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया, जिनमें बालिकाओं की प्रतिभा, संघर्ष और आत्मनिर्भरता के संदेश को खूबसूरती से उकेरा गया था।

कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, अभिभावकों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। अंकिश पटेल, सुश्री सरला सिंह सहित सरोकार संस्था के सदस्य भी उपस्थित थे।

पूरे आयोजन ने इस संदेश को दोहराया कि—

“बालिकाएं सिर्फ बदलाव की प्रतीक्षा नहीं करतीं, बल्कि बदलाव की दिशा तय करती हैं।”

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