By: Ravindra Singh
क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लकड़ी तस्कर सामान्य बबूल के पेड़ों की आड़ लेकर प्रतिबंधित और कीमती प्रजातियों के पेड़ों को निशाना बना रहे हैं। इस गतिविधि के कारण वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध कटाई पर रोक लगाने की मांग की है।
रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से लकड़ी पहुंचाने का दावा
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ियों को रात के समय ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए क्षेत्र की आरा मशीनों तक पहुंचाया जा रहा है। लोगों ने लकड़ी के परिवहन और आरा मशीनों तक पहुंचने वाली खेप की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि लकड़ी की प्रजातियों, परिवहन संबंधी दस्तावेजों और कटाई की वैधता की जांच से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी लोगों की नजरें
मामले को लेकर वन विभाग की भूमिका भी चर्चा में है। स्थानीय रेंजर का कहना है कि विभाग की ओर से लगातार गश्त की जा रही है और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। हालांकि, नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि लकड़ी की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जाए तथा संदिग्ध आरा मशीनों तक पहुंचने वाली लकड़ी की जांच की जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान क्या तथ्य सामने आते हैं और अवैध कटाई पर अंकुश लगाने के लिए विभाग आगे क्या कदम उठाता है।



