By: Ravindra Singh
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब दुकान का ठेका हासिल करने के लिए करीब 2.75 करोड़ रुपये की कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) जमा कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बैंक ने संबंधित FDR जारी करने से इनकार किया था, इसके बावजूद उसे ठेके के लिए सुरक्षा राशि के दस्तावेज के रूप में स्वीकार कर लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त संगठन ने जांच शुरू कर दी है।
यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल के पीएंडटी चौराहा कंपोजिट शराब दुकान समूह के ठेके से जुड़ा है। प्रकरण में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा के साथ हरियाणा के झज्जर निवासी शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, मामले में लगे आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
2.75 करोड़ रुपये की FDR और सत्यापन रिपोर्ट पर सवाल
शराब दुकान समूह का ठेका लेने के लिए 2 करोड़ 75 लाख 33 हजार 335 रुपये की FDR जमा कराए जाने का आरोप है। इसके साथ कथित तौर पर सत्यापन रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक द्वारा FDR जारी करने से इनकार किए जाने के बावजूद संबंधित दस्तावेज को वैध मानकर स्वीकार कैसे किया गया।
जांच के दौरान FDR तैयार करने, उसे जमा कराने और सत्यापन रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि ठेका आवंटन से पहले दस्तावेजों की जांच निर्धारित नियमों के मुताबिक की गई थी या नहीं।
विभागीय कार्रवाई के बाद लोकायुक्त ने शुरू की जांच
मामले में विभागीय जांच के बाद दीपम रायचूरा को 12 अक्टूबर को निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले उन्हें उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी के अतिरिक्त प्रभार से भी हटाया गया था। अब लोकायुक्त संगठन की जांच शुरू होने के बाद प्रकरण आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है।
जांच एजेंसी शराब दुकान समूह के ठेके से जुड़े दस्तावेजों, कथित FDR और उससे संबंधित सत्यापन प्रक्रिया की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि ठेका आवंटन और लाइसेंस हस्तांतरण के दौरान नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका भी खंगाली जाएगी
लोकायुक्त की जांच में नामजद आरोपियों के अलावा उन सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी देखी जा सकती है, जो कथित दस्तावेज तैयार करने, सत्यापन कराने या उन्हें स्वीकार करने की प्रक्रिया से जुड़े थे।
जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि संबंधित FDR किसने जमा कराई, सत्यापन रिपोर्ट किस आधार पर तैयार हुई और अधिकारियों ने दस्तावेजों को स्वीकार करने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई। फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही कथित वित्तीय अनियमितता की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।





