By: Ravindra Singh
मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्यप्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिया गया है। उनके नामांकन पत्रों को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। पार्टी का आरोप था कि पुरी के नामांकन और शपथपत्र में 100 से अधिक कमियां हैं। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए उनके निर्वाचन का रास्ता साफ कर दिया।
कांग्रेस अब इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करेगी।
नामांकन और शपथपत्र पर कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
हरदीप सिंह पुरी के दस्तावेजों की जांच के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। कांग्रेस ने दावा किया था कि नामांकन और शपथपत्र में 100 से ज्यादा खामियां हैं।
आपत्तियों में पत्नी के नाम का उल्लेख नहीं होने, विदेशों में मौजूद संपत्तियों का विवरण अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक में देने तथा जेनेवा स्थित संपत्ति और विदेशी बैंक खातों की जानकारी को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके अलावा नोटरी सत्यापन और शपथपत्र प्रमाणित करने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई गई थी।
निर्वाचन अधिकारी उमेश कुमार शर्मा ने हरदीप सिंह पुरी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। दस्तावेजों की जांच के बाद सभी आपत्तियों को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया। अधिकारी के अनुसार, नामांकन में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं मिला।
दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे निरस्त, पुरी अकेले उम्मीदवार बचे
राज्यसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी का समर्थन किया था। उन्होंने कांग्रेस विधायकों के समर्थन से अपना नामांकन दाखिल किया, लेकिन जरूरी Form-26 शपथपत्र जमा नहीं करने के कारण उनका पर्चा निरस्त कर दिया गया। लोहानी ने दस्तावेज पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने इसकी अनुमति नहीं दी।
वहीं, दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार कांते सायन्ना का नामांकन भी अधूरी जानकारी के चलते खारिज हो गया। इस तरह जांच के बाद हरदीप सिंह पुरी का नामांकन ही वैध बचा और उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
पुरी के निर्वाचन के बाद मध्यप्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों का राजनीतिक समीकरण भी बदल गया है। अब भाजपा के पास 10 और कांग्रेस के पास केवल एक सीट रह गई है। इससे पहले भाजपा के 9 और कांग्रेस के 2 सदस्य थे।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट, जानें पुरी का राजनीतिक सफर
मध्यप्रदेश की यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 14 अक्टूबर को राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की। भाजपा ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था।
हरदीप सिंह पुरी का जन्म 15 फरवरी 1952 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। वर्ष 1974 में वे भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए और 2009 से 2013 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे।
पुरी ने वर्ष 2014 में भाजपा की सदस्यता ली थी। 2019 से 2021 के बीच उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार और वाणिज्य मंत्रालय संभाला। मई 2021 में उन्हें पेट्रोलियम मंत्री बनाया गया। अब मध्यप्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा पहुंचने के बाद कांग्रेस उनके निर्वाचन को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।




