EPF, PPF और GPF खातों को लेकर न हों कन्फ्यूज, जानिए इनके फायदे और इनमें क्या हैं फर्क

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्‍य निधि (EPF), लोक भविष्‍य निधि (PPF) और जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) निवेश के बेहतरीन विकल्प हैं। कई बार लोगों को इनके नाम को लेकर भ्रम हो जाता है। लेकिन ये तीनों स्कीम अलग-अलग हैं। हम इस खबर में आपको तीनों के निवेश विकल्प को लेकर जानकारी दे रहे हैं।

योग्यता: EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) केवल वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए है। यह एक अनिवार्य बचत योजना है जो 20 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी के कर्मचारियों के लिए लागू होती है, जिनका वेतन निर्धारित न्यूनतम राशि से अधिक है।

PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड): यह बैंकों और डाकघरों की ओर से सभी के लिए पेश किया जाता है, इसमें वेतनभोगी होना मायने नहीं रखता।

योगदान: वेतनभोगी के लिए EPF में निवेश अनिवार्य है। इसमें निवेश के लिए बेसिक और डीए का 12 फीसद तक ईपीएफ खाते में काटकर जमा किया जाता है।

PPF: यह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना है। एक वित्तीय वर्ष में आपको न्यूनतम जमा राशि 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये करने की अनुमति है। इसमें एकमुश्त या किस्तों में योगदान किया जा सकता है।

टैक्स छूट: आपके ईपीएफ मैच्योर होने पर मिलने वाली राशि को केवल तभी छूट दी जाती है जब आपके पास कम से कम पांच साल की निरंतर जॉब का ट्रैक रिकॉर्ड हो।

PPF: PPF को EEE कर का दर्जा प्राप्त है। इसका मतलब है कि आपका पीपीएफ निवेश सभी स्तरों, कर, संचय और मैच्योरिटी पर कर-मुक्त है।

इंटरेस्ट रेट: EPF पर ब्याज दर हर साल EPFO घोषित करता है। 2017-18 के लिए इसे 8.55 फीसद तय किया गया था।

PPF की ब्याज दरें 10 साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड और तिमाही आधार पर बदलती हैं। 2018-19 की अंतिम तिमाही में पीपीएफ ब्याज दर 8 फीसद की दर से मिल रही है।

लॉक-इन पीरियड: EPF खाते में पांच साल की लॉक-इन अवधि होती है। PPF में 15 साल की लॉक-इन अवधि होती है।

जनरल प्रोविडेंट फंड यानी GPF: GPF अकाउंट एक प्रकार का प्रोविडेंट फंड है। फिलहाल इसमें केवल सरकारी कर्मचारी ही पैसे जमा कर सकते हैं। कर्मचारी चाहे तो बीच में भी इस पैसे को जरुरत के समय निकाल सकता है। इसमें अच्‍छी बात यह है कि इसमें जमा पैसा रिटायरमेंट के वक्‍त सरकारी कर्मचारी को मिल जाता है।

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