राहुल गांधी के ‘डराया जा रहा’ वाले वीडियो से उठे सवाल, भागीरथपुरा की मौतों और प्रशासन के डेथ ऑडिट में अलग दावे

इंदौर.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भागीरथपुरा दौरे के वीडियो से दूषित पानी पीने से हुई मौतों की संख्या पर फिर सवाल खड़ा हो गया है। सवाल राहुल गांधी ने खुद नहीं उठाया है। इंदौर में राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा था कि लोगों को डराया जा रहा है। अब वीडियो में राहुल गांधी से बात करते हुए भागीरथपुरा के रहवासी कहते सुनाई दे रहे हैं कि 29 जनवरी को जब क्षेत्र में फैली बीमारी मीडिया की सुर्खी बनी, उससे पहले ही लोग बीमार हो रहे थे और मौतें भी हुईं।

खुद लोगों ने राहुल के सामने कह दिया कि बीमार हुए और मरने वालों का आंकड़ा छुपाया गया है। इस वीडियो के बाद प्रशासन ने जो डेथ ऑडिट किया, उस पर भी सवाल खड़े हुए हैं। रहवासी कह रहे हैं कि जब 200 से 250 मरीज अस्पताल पहुंचे, तब प्रशासन ने संज्ञान लिया।

21 मौतों का ही विश्लेषण किया गया
कोर्ट के दबाव में प्रशासन ने जो डेथ ऑडिट किया, उसमें 12 जनवरी तक हुई 21 मौतों का ही विश्लेषण किया गया। इसमें अलग-अलग श्रेणी में मौतों को रखा गया। छह मौतों को सीएमएचओ ने महामारी से हुई मौत बताया। इन मृतकों के नाम उर्मिला, तारा, नंदलाल, हीरालाल, अरविंद और पांच माह का अव्यान है। इसके अलावा चार मौतों को महामारी से जुड़ी संभावित मौत माना गया। इनमें गीता, उमा कोरी, गोमती व श्रवण के नाम हैं। अस्पताल पहुंचने से पहले हुई चार मौत भी इसी से संभावित मानी गई। इनमें सीमा, जीवन, रामकली व हरकुबाई का नाम शामिल है। दो मौत महामारी से पहले हो चुकी थीं, यह भी डेथ ऑडिट में माना गया। इस श्रेणी के मृतकों में सुमित्रा व संतोष का नाम रखा गया।

प्रशासन महामारी 24 दिसंबर से मानता है
प्रशासन महामारी 24 दिसंबर से मानता है। कमला पत्नी तुलसीराम व सुनीता पत्नी सतीश इस तारीख से पहले मर चुकी थीं। इसलिए इन दो मौतों को भी भागीरथपुरा त्रासदी की सूची से बाहर रखा गया। इसके अलावा चार मौतों को तो महामारी से अलग कारणों से होना बताया गया। इनमें अशोक, शंकर लाल, कमला व सुनीता का नाम है।

मंजुला नामक महिला की रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। जबकि क्षेत्रवासियों के अनुसार अन्य मृतक भी हैं, जिनमें सुमित्रा देवी, अशोकलाल पंवार, गोमती रावत, उर्मिला यादव, जीवनलाल बरेड़े, सीमा प्रजापत, संतोष बिगोलिया, अव्यान साहू, श्रवण खुपराव, रामकली, नंदलाल, उमा कोरी, मंजुला वाढ़े, ताराबाई, हीरालाल, अरविंद लिखर, गीताबाई, हरकुंवर बाई, शंकर भाया, ओमप्रकाश शर्मा, सुनीता वर्मा और भगवानदास का नाम शामिल है।

एक अन्य सुभद्राबाई की मौत 15 जनवरी को हुई, जिसका प्रशासन ने खंडन किया और कहा कि डायरिया से इस मौत का कोई वास्ता नहीं है। इस तरह आम लोगों के आंकड़े में इन सभी मौतों को मिलाकर मरने वालों की संख्या 24 हो रही है।

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