By: Ravindra Singh
मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 का प्रारूप जारी किया है। प्रस्तावित नियमों में कोचिंग सेंटरों के पंजीयन से लेकर फीस, शिक्षकों की योग्यता, सुरक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य तक कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
नए प्रस्ताव के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर, शिक्षकों का विवरण, उपलब्ध सुविधाएं और फीस वापसी की नीति जैसी जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसके अलावा परिसर में CCTV कैमरे, साफ पेयजल, प्राथमिक उपचार और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की व्यवस्था भी करनी होगी। हालांकि, फिलहाल ये नियम प्रारूप के रूप में जारी किए गए हैं और इन्हें अंतिम रूप से लागू मानना उचित नहीं होगा।
90 दिन में पंजीयन, हर ब्रांच का अलग रजिस्ट्रेशन जरूरी
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, कोचिंग सेंटर संचालकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन की वैधता तीन साल रखने का प्रस्ताव है। अवधि समाप्त होने के बाद संस्थान को नवीनीकरण कराना पड़ेगा।
यदि किसी कोचिंग संस्थान की अलग-अलग जगहों पर कई शाखाएं संचालित हो रही हैं, तो प्रत्येक शाखा के लिए अलग पंजीयन कराना होगा। पंजीयन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।
कोचिंग संस्थानों के लिए अपनी वेबसाइट पर महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। इसमें संस्थान की स्थापना का वर्ष, शिक्षकों और कर्मचारियों के नाम, उनकी संख्या, शैक्षणिक योग्यता, पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम, फीस का पूरा विवरण और विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाएं शामिल होंगी।
इसके अलावा दाखिला रद्द करने, फीस वापस लेने के नियम, कक्षाओं का समय, पिछले वर्षों में संचालित पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों की संख्या और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी वेबसाइट पर बतानी होगी। मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता और हेल्पलाइन की जानकारी देना भी प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा है।
CCTV, योग्य शिक्षक और मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग पर जोर
प्रस्तावित नियमों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और संस्थान की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। कोचिंग सेंटरों में निर्धारित स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने होंगे, लेकिन निजता का विशेष ध्यान रखना होगा। शौचालय, चेंजिंग रूम और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श कक्ष में कैमरों से रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होगी।
संस्थानों को पर्याप्त बैठने की जगह, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे। सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था के साथ परिसर में आने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखने का प्रावधान भी शामिल है।
शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में प्रस्तावित नियमों में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक रखी गई है। इसके अतिरिक्त, कुछ श्रेणियों के व्यक्तियों को शिक्षक या सहायक कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने पर प्रतिबंध संबंधी प्रावधान भी प्रस्तावित हैं।
विद्यार्थियों पर परीक्षा की तैयारी के दौरान पड़ने वाले मानसिक दबाव को देखते हुए मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर भी जोर दिया गया है। कोचिंग संस्थानों को योग्य परामर्शदाता उपलब्ध कराने, नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित करने और करियर मार्गदर्शन देने की व्यवस्था करनी होगी। विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने के लिए अभिभावकों के साथ संवाद करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
प्रस्तावित नियमों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान या अन्य निर्धारित आधारों पर भेदभाव रोकने की बात कही गई है। दिव्यांग विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परिसर में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।
विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर:
- टेली-मानस: 14416
- उमंग: 1800-11-5246
- आपातकालीन सहायता: 112
- चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
शिकायतों के लिए पेटियां, जिला स्तर पर निगरानी और अपील की व्यवस्था
कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत प्रमुख स्थानों पर शिकायत एवं सुझाव पेटियां लगाई जाएंगी, जिन्हें नियमित अंतराल पर खोला जाएगा। विद्यार्थी लिखित या ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
जिला स्तर पर शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाने की योजना है। वहीं, कोचिंग सेंटरों के पंजीयन और नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए जिला स्तरीय समिति गठित करने का प्रावधान है। इस समिति की अध्यक्षता कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट करेंगे। इसमें पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
राज्य स्तर पर भी निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव है। यह समिति नियमों के पालन की समीक्षा करने, सरकार को जरूरी मानकों के संबंध में सुझाव देने और वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम करेगी।
यदि किसी कोचिंग सेंटर का पंजीयन रद्द किया जाता है, आवेदन खारिज होता है या नवीनीकरण से इनकार किया जाता है, तो संबंधित संस्थान को अपील करने का अधिकार देने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। इसके लिए आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, अपील पर 45 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
विद्यार्थियों और अभिभावकों को क्या होगा फायदा?
इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाना और दाखिले से पहले विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है। वेबसाइट पर फीस, शिक्षकों की योग्यता और सुविधाओं का विवरण मिलने से अलग-अलग संस्थानों की तुलना करना आसान हो सकता है। वहीं, सुरक्षा मानकों और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की व्यवस्था से विद्यार्थियों की जरूरतों पर अधिक ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
फिलहाल मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने नियमों का प्रारूप जारी किया है। अंतिम अधिसूचना और लागू होने की तारीख से संबंधित आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से प्रावधान किस रूप में प्रभावी होंगे।




