किसानों के मुद्दों पर भाजपा संगठन से बढ़ी थी नाराजगी, सक्सेना बोले—जनता की आवाज उठाना अपराध नहीं
छिंदवाड़ा की राजनीति में भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना के इस्तीफे से हलचल तेज हो गई है। सक्सेना ने भाजपा छोड़ने का फैसला किया है और अब उनके कांग्रेस में दोबारा शामिल होने की चर्चा है। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।

किसानों के मुद्दों को लेकर किया था शक्ति प्रदर्शन
पिछले दिनों अमित सक्सेना ने किसानों की समस्याओं को लेकर छिंदवाड़ा बस स्टैंड पर शक्ति प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने, चौसरा न्यूक्लियर प्लांट का काम रोकने और किसानों को चार गुना मुआवजा देने की मांग उठाई थी। इस प्रदर्शन के बाद भाजपा संगठन की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया था।
बोले—मैं सर्कस का शेर नहीं हूं
नोटिस जारी होने के बाद अमित सक्सेना ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, “मैं सर्कस का शेर नहीं हूं, मुझे जनता ने चुना है। जनता की आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है।” किसानों के मुद्दों पर उनके प्रदर्शन और संगठन के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच अब उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है।
22 हजार वोटों से जीते थे जिला पंचायत चुनाव
अमित सक्सेना ने जिला पंचायत चुनाव में करीब 22 हजार मतों से जीत दर्ज की थी। उनके भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में वापसी की तैयारी से छिंदवाड़ा के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके अगले राजनीतिक कदम और कांग्रेस में औपचारिक वापसी को लेकर अब सबकी नजरें टिकी हैं।




