MP High Court: शिक्षकों को 2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने के लिए 4 सप्ताह का समय, 70 हजार कर्मचारियों को मिल सकती है राहत

By: Ravindra Singh

मध्य प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए छठे वेतनमान से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुराने आदेश का पालन करने के लिए चार सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तय समय में आदेश का पालन नहीं होने पर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देना पड़ सकता है। इस मामले से प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

हाईकोर्ट ने सरकार को दिया चार सप्ताह का समय

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छठे वेतनमान से संबंधित पूर्व आदेश लागू करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि अध्यापक संवर्ग के पात्र शिक्षकों को वर्ष 2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने के आदेश पर अमल किया जाए।

यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होता है, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अनुपालन में देरी का कारण बताना होगा। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित बताई गई है।

इस विवाद का संबंध उन शिक्षकों से है, जो पहले पंचायत विभाग के अंतर्गत नियुक्त हुए थे और बाद में शिक्षा विभाग में शामिल किए गए। शिक्षकों का पक्ष है कि उनकी शुरुआती नियुक्ति से जुड़ी सेवा अवधि की सही गणना नहीं होने के कारण वेतनमान, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ प्रभावित हुए।

2006 से वेतनमान लागू करने की मांग, एरियर से मिल सकता है बड़ा फायदा

शिक्षकों के मुताबिक, छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से प्रभावी हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ वर्ष 2016 से दिया गया। इसी अंतर को दूर करने और पहली नियुक्ति से सेवा की गणना कराने के लिए शिक्षकों ने अदालत का रुख किया था। इस मामले में राजेश पांडे सहित 497 शिक्षकों की याचिकाओं का भी उल्लेख किया गया है।

बताया गया है कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के पहले फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 24 अगस्त 2026 को उसकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज हो गई। इसके बाद आदेश का पालन नहीं होने पर शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की।

यदि 2006 से वेतनमान का लाभ देने संबंधी आदेश लागू होता है, तो पात्र शिक्षकों को बकाया वेतन यानी एरियर, वेतन निर्धारण में संशोधन, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ मिल सकते हैं। कुछ अनुमानों के मुताबिक, संबंधित शिक्षकों के बकाये की राशि लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। मासिक वेतन में भी उल्लेखनीय अंतर आने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, प्रत्येक शिक्षक को मिलने वाली वास्तविक राशि उसकी नियुक्ति की तारीख, सेवा अवधि, वेतन निर्धारण और लागू नियमों पर निर्भर करेगी। एरियर की राशि और ब्याज संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि के बिना इन्हें अंतिम लाभ नहीं माना जाना चाहिए।

करीब 70 हजार शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम पर

इस मामले में हाईकोर्ट की ताजा समय-सीमा के बाद अब राज्य सरकार के अनुपालन पर सबकी नजर है। शिक्षकों को उम्मीद है कि पुराने आदेश पर कार्रवाई होने से लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी विवाद का समाधान निकल सकता है।

शिक्षकों का कहना है कि पंचायत विभाग के अधीन की गई शुरुआती सेवा को उचित मान्यता मिलने से वेतन वृद्धि, वरिष्ठता और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों की गणना पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम लाभ का दायरा सरकारी आदेश, संबंधित सेवा नियमों और प्रत्येक कर्मचारी के रिकॉर्ड के आधार पर तय होगा।

फिलहाल अदालत ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। निर्धारित अवधि में आदेश लागू नहीं होने पर विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब देना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार का निर्णय प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

महत्वपूर्ण: शिक्षकों को मिलने वाले वास्तविक एरियर, ब्याज और मासिक वेतन में बढ़ोतरी की राशि संबंधित आधिकारिक आदेश और व्यक्तिगत वेतन निर्धारण के बाद ही स्पष्ट होगी।

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