न्यू अर्बनिज़्म पॉलिसी से बदलेगा भोपाल का चेहरा – भेल भूमि पर क्वांटम टेक कैपिटल और स्मार्ट टाउनशिप का रास्ता खुला

विवेक झा, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार की इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी 2025 अब राजधानी भोपाल को एक नई पहचान देने जा रही है। यह नीति न सिर्फ़ ‘न्यू अर्बनिज़्म’ की अवधारणा को मूर्त रूप देगी बल्कि शहर के सबसे बड़े लैंड-बैंक – भेल की करीब 2200 एकड़ रिक्त भूमि – को क्वांटम टेक्नोलॉजी कैपिटल और स्मार्ट टाउनशिप में बदलने का अवसर भी प्रदान करेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नीति भोपाल को भारत के अग्रणी भविष्य-नगरीय मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।

60 दिन में अनुमोदन और सिंगल विंडो क्लीयरेंस

नीति में स्पष्ट किया गया है कि डेवलपर्स को परियोजनाओं की स्वीकृति अब अधिकतम 60 दिनों में मिल सकेगी। इसके लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस अथॉरिटी बनाई जाएगी। इससे निजी निवेशकों, कंसोर्टियम और जॉइंट वेंचर कंपनियों को सहजता से परियोजना शुरू करने की सुविधा मिलेगी।

वर्क-टू-वॉक मॉडल और आधुनिक टाउनशिप

नई टाउनशिप में “वर्क-टू-वॉक” मॉडल लागू किया जाएगा। यानी आवासीय क्षेत्रों के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, उद्योग, वाणिज्यिक केंद्र, परिवहन, बाजार और मनोरंजन की सुविधाएं साथ विकसित होंगी। इससे न केवल नागरिकों की जीवनशैली आसान होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

हरित क्षेत्र और नवीकरणीय ऊर्जा पर प्रोत्साहन

नीति में ग्रीन एरिया, नवीकरणीय ऊर्जा और किफायती आवास पर विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है।

  • डेवलपर यदि परियोजना की कुल बिजली ज़रूरत का 35% नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करता है, तो अतिरिक्त FAR (Floor Area Ratio) मिलेगा।

  • 25% परियोजना यदि ग्रीहा-3 या समकक्ष ग्रीन रेटिंग हासिल करती है तो 0.05 से 0.20 तक अतिरिक्त FAR का लाभ मिलेगा।

  • EWS और LIG आवास पर FAR से पूर्ण छूट दी जाएगी।

  • 0.4 हेक्टेयर या उससे अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने पर डेढ़ गुना FAR का अधिकार होगा।

भेल की भूमि – भोपाल का गेम-चेंजर

भोपाल की औद्योगिक त्रासदी के चार दशक बाद यह शहर फिर से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। भेल की 2200 एकड़ भूमि पर टाउनशिप और क्वांटम टेक्नोलॉजी हब विकसित होने से भोपाल देश का पहला क्वांटम टेक कैपिटल बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां एआई लाइटहाउस, क्वांटम कम्प्यूटिंग सेंटर और स्मार्ट इंडस्ट्री टाउनशिप की स्थापना से राजधानी का भविष्य पूरी तरह बदल जाएगा।

वैश्विक मॉडल से प्रेरणा

नीति के स्वरूप में महाराष्ट्र और गुजरात की टाउनशिप पॉलिसियों से प्रेरणा ली गई है, जिन्होंने बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया। वहीं, दुबई और सिंगापुर की तरह “वर्क-लिव-लीजर” मॉडल को भोपाल की स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार ढाला गया है।

कमाल का भोपाल अभियान की प्रतिक्रिया

‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर मनोज मीक ने कहा—
“न्यू अर्बनिज़्म के ये नीति-नियम भोपाल को भारत की क्वांटम टेक्नोलॉजी कैपिटल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं। राजधानी को प्राप्त यह अवसर शहर को फ्यूचर-रेडी रीजन में बदल देगा। हम मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हैं।”

भोपाल के लिए यह नीति एक ऐतिहासिक अवसर है। सिंगल विंडो क्लीयरेंस, समयबद्ध अनुमोदन और आधुनिक प्रोत्साहनों के साथ भेल की रिक्त भूमि पर जब स्मार्ट टाउनशिप और क्वांटम टेक हब विकसित होंगे तो शहर न सिर्फ़ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए फ्यूचर अर्बनिज़्म का मॉडल बनकर उभरेगा।

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