जीएसटी विवरणी में बड़े बदलाव: अब 3 वर्ष बाद नहीं भर सकेंगे पुरानी रिटर्न — टैक्स ला बार एसोसिएशन की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

विवेक झा, भोपाल, अक्टूबर 2025। जीएसटी विभाग ने विवरणी (रिटर्न) प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए हैं, जिसके चलते अब व्यापारियों और कर सलाहकारों को विवरणी भरते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी। टैक्स ला बार एसोसिएशन द्वारा अपने सदस्यों के लिए आयोजित एक विशेष कार्यशाला में युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट हर्षित मुरलीधर काकवानी ने यह जानकारी दी।

टैक्स ला बार एसोसिएशन की कार्यशाला में सदस्यों को जानकारी देते चार्टर्ड अकाउंटेंट हर्षित मुरलीधर काकवानी।

उन्होंने कहा कि बिल प्रबंधन प्रणाली में भी अब व्यापारी और कर सलाहकारों को पूरी सतर्कता बरतनी होगी। प्रत्येक बिल की गहन जांच के बाद ही उसे स्वीकृत (accept) या अस्वीकृत (reject) किया जाना चाहिए, क्योंकि एक बार कार्रवाई करने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन या सुधार संभव नहीं होगा। यह व्यवस्था कर पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है, लेकिन इसके साथ ही मानवीय भूल की संभावना को भी न्यूनतम करने की जरूरत होगी।

काकवानी ने सलाह दी कि सभी व्यापारियों को वार्षिक जीएसटी विवरणी (GSTR-9) अवश्य प्रस्तुत करनी चाहिए, भले ही उनका टर्नओवर दो करोड़ रुपये से कम क्यों न हो। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल कानूनी दृष्टि से सुरक्षित बनाती है, बल्कि व्यवसाय की कर-रिकॉर्ड पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती है।

इसके साथ ही उन्होंने आयकर अधिनियम में ऑडिट रिपोर्ट से जुड़े हालिया परिवर्तनों की भी जानकारी दी और बताया कि इन बदलावों का प्रत्यक्ष प्रभाव कर परामर्श और रिपोर्टिंग व्यवस्था पर पड़ेगा।

कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष मृदुल आर्य, सचिव मनोज पारख, सहसचिव संदीप चौहान, कोषाध्यक्ष धीरज अग्रवाल, तथा सदस्य सुनील गौतम, हेमंत जैन, शहादत खान सहित बड़ी संख्या में कर सलाहकार एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट उपस्थित रहे।

कार्यशाला के दौरान उपस्थित सदस्यों ने जीएसटी की नई प्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और विभाग से कुछ व्यावहारिक सुधारों की अपेक्षा भी जताई।


“जीएसटी व्यवस्था में हो रहे निरंतर बदलावों को समझना और समय पर पालन करना ही अब करदाताओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” — सीए हर्षित मुरलीधर काकवानी

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