Chhattisgarh Weekly News: शराब घोटाले की जांच, शिक्षकों की TET और भर्ती परीक्षाओं पर घमासान, जानें सप्ताह की 7 बड़ी खबरें

By: Ravindra Singh

छत्तीसगढ़ की साप्ताहिक खबरें: छत्तीसगढ़ में बीता सप्ताह भ्रष्टाचार के मामलों, सरकारी फैसलों और राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से काफी अहम रहा। बहुचर्चित शराब घोटाले में जांच एजेंसियों की नई कार्रवाई हुई, वहीं खेल विभाग की खरीदी प्रक्रिया पर सवाल उठे। प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करने की सहमति से राहत की उम्मीद जगी। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षाओं के स्थगित होने से युवाओं की चिंता बढ़ी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर दौरे और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बिलासपुर यात्रा ने भी सुर्खियां बटोरीं। आइए, जानते हैं इस सप्ताह की सात प्रमुख खबरें और उनका असर।

शराब घोटाले में नई कार्रवाई, 20 लोगों और 22 कंपनियों के खिलाफ चालान

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसियों ने 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों एवं कंपनियों के खिलाफ दसवां चालान पेश किया। मामले से संबंधित करीब 27 हजार पन्नों के दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस कथित घोटाले में करीब 3,076.34 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। इसी प्रकरण के सिलसिले में आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को निलंबित किए जाने की भी खबर है।

इस कार्रवाई के बाद शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया और जांच के अगले चरण पर नजर रहेगी।

खेल विभाग की खरीदी पर सवाल, 80 हजार शिक्षकों को TET से राहत की उम्मीद

खेल विभाग में खेल सामग्री की खरीद और भुगतान को लेकर भी सवाल उठे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जूडो, खो-खो और कबड्डी की सामग्री के लिए एक ही दिन में पांच अलग-अलग बिल जारी किए गए, जिनकी कुल राशि करीब 14.85 लाख रुपये बताई गई है। वेटलिफ्टिंग उपकरणों की खरीद और हॉकी टर्फ की सफाई के भुगतान को लेकर भी चर्चा हुई।

आरोप है कि खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निविदा प्रक्रिया से बचने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। सरकारी खरीद में पारदर्शिता और वित्तीय नियमों का पालन इस मामले के प्रमुख सवाल हैं।

वहीं, प्रदेश के करीब 80 हजार सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने पर राज्य सरकार की सहमति राहत की खबर बनकर आई। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से कंप्यूटर आधारित तरीके से आयोजित किए जाने की बात कही गई है। साल में कम से कम दो बार परीक्षा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह फैसला उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी नौकरी और पदोन्नति की संभावनाएं TET की अनिवार्यता से जुड़ी हैं। परीक्षा की तारीखों और विस्तृत नियमों को लेकर अब आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार रहेगा।

भर्ती परीक्षाओं से युवाओं की परेशानी, राष्ट्रपति और मोहन भागवत का दौरा चर्चा में

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी सप्ताह चुनौतीपूर्ण रहा। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग और प्लाटून कमांडर मुख्य परीक्षा-2024 को स्थगित कर दिया। परीक्षा पहले नवंबर में आयोजित होने की संभावना थी। इसके अलावा, शिक्षक भर्ती में न्यायिक प्रक्रिया और आरक्षण से जुड़े मुद्दों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।

अभ्यर्थियों की मांग है कि भर्ती परीक्षाओं का स्पष्ट कैलेंडर जारी किया जाए और चयन प्रक्रिया समय पर पूरी हो। परीक्षा स्थगित होने से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

इस बीच, आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का 22 और 23 अक्टूबर को बिलासपुर दौरा भी चर्चा में रहा। संगठनात्मक बैठकों और कार्यक्रमों के दौरान संघ के विस्तार तथा भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक ढांचे को रायपुर और बिलासपुर केंद्रित इकाइयों में बांटने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई, हालांकि इस संबंध में किसी बदलाव को आधिकारिक निर्णय मानने से पहले पुष्टि जरूरी है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का छत्तीसगढ़ प्रवास भी सप्ताह की प्रमुख घटनाओं में शामिल रहा। रायपुर के कार्यक्रमों के बाद उनके बस्तर दौरे में मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन, पारंपरिक मुरिया दरबार और लालबाग मैदान के कार्यक्रमों को प्रमुखता मिली। इस दौरे ने बस्तर की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया। साथ ही, क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

इसी सप्ताह पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने भी प्रशासनिक कामकाज को लेकर चिंता बढ़ाई। राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण और जमीन से जुड़े कार्य प्रभावित होने की आशंका के चलते आम नागरिकों को परेशानी हो सकती है। अब कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच बातचीत से समाधान निकलने की उम्मीद है।

सप्ताह का निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में बीते सप्ताह की घटनाओं ने सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध फैसलों की जरूरत को सामने रखा। शराब घोटाले की जांच और खेल विभाग की खरीद से जुड़े सवालों के बीच शिक्षकों के लिए विशेष TET की सहमति राहत की उम्मीद लेकर आई। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षाओं की अनिश्चितता और पटवारियों की हड़ताल ने आम लोगों तथा युवाओं की मुश्किलें बढ़ाईं। राष्ट्रपति के बस्तर दौरे ने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता दी। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई, भर्ती प्रक्रिया और कर्मचारियों से जुड़े फैसलों पर सबकी नजर रहेगी।

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