By: Ravindra Singh
मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाल इमारतों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों में महज पांच महीने के भीतर बड़ा अंतर देखने को मिला है। फरवरी 2026 में सरकार ने प्रदेश के 5,735 सरकारी स्कूल भवनों को जर्जर बताया था, जबकि जुलाई में दावा किया गया कि अब एक भी सरकारी स्कूल का भवन जर्जर नहीं है। दूसरी ओर, कई स्कूलों में आज भी छतों से पानी टपकने, दीवारों में दरारें और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने कम समय में हजारों भवनों की स्थिति में सुधार कैसे हो गया।
पांच महीने में बदले आंकड़ों ने खड़े किए सवाल
फरवरी 2026 में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने जानकारी दी थी कि मध्य प्रदेश में 5,735 सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। इसके अलावा 1,700 से अधिक स्कूलों में शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। लेकिन जुलाई 2026 के मानसून सत्र में विभाग की ओर से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि प्रदेश में अब कोई भी सरकारी स्कूल भवन जर्जर नहीं है। दोनों जवाबों के बीच इतना बड़ा अंतर आने से सरकारी दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। अगर सभी जर्जर भवनों की स्थिति सुधार दी गई थी, तो इसके लिए किए गए काम और खर्च का पूरा विवरण भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
निर्माण कार्यों की मंजूरी और जमीनी स्थिति में अंतर
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि खराब इमारतों की जगह नए भवन बनाने और स्कूलों में अतिरिक्त कमरे तैयार करने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। वर्ष 2026-27 में क्षतिग्रस्त भवनों के स्थान पर 840 स्कूलों में नए भवन बनाने की मंजूरी दी गई। पिछले दो वर्षों में भवनविहीन 230 स्कूलों के लिए भी नए भवन स्वीकृत किए गए। वहीं, वर्ष 2025-26 में 369 हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में 1,179 अतिरिक्त कक्षों के निर्माण को मंजूरी मिली थी। वर्ष 2026-27 में 56 स्कूलों के लिए 222 अतिरिक्त कमरे स्वीकृत किए गए। हालांकि, इन आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि फरवरी में जर्जर घोषित किए गए सभी 5,735 भवनों की समस्या पांच महीने में किस तरह दूर कर दी गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य शिक्षा केंद्र के आधिकारिक पोर्टल पर अब भी 5,770 स्कूलों में नए भवन, बड़े स्तर पर मरम्मत या शौचालय निर्माण की जरूरत दर्ज है। यह संख्या फरवरी में बताए गए जर्जर भवनों के आंकड़े से भी अधिक है। बैतूल जिले के रिंगढाना में स्कूल परिसर का एक हिस्सा ढह चुका है, जबकि मुख्य भवन की छत और फर्श पर गहरी दरारें हैं। कई स्कूलों में बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है और दीवारों में सीलन की समस्या बनी हुई है। सीहोर जिले के खिड़ियाकुर्मी स्कूल में खिड़कियां तक नहीं होने की बात सामने आई है। स्थानीय बीआरसी मणिशंकर शर्मा के अनुसार, इस भवन को जर्जर घोषित किया जा चुका है। मरम्मत के लिए जारी 1.50 लाख रुपये की राशि के कथित दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं।
विभाग ने बताया आंकड़े बदलने का कारण, कमलनाथ ने उठाई बच्चों की सुरक्षा की मांग
आंकड़ों में अंतर को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में करीब 79 हजार प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय हैं। स्कूलों में सुधार और मरम्मत का काम लगातार चलता रहता है, इसलिए स्थिति से जुड़े आंकड़ों में हर महीने बदलाव हो सकता है। उनके मुताबिक, पहले खराब स्थिति में रहे कुछ भवनों में सुधार कराया गया है और नए सामने आने वाले मामलों में भी जरूरी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जर्जर स्कूलों की वास्तविक स्थिति और विभागीय आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर सवाल बने हुए हैं।
इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सरकार को घेरा है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों की समस्याओं को केवल कागजों पर ठीक दिखाने के बजाय जमीनी स्तर पर उनका समाधान किया जाए। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जर्जर भवनों की मरम्मत, नए निर्माण और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभाग के दावों और स्कूलों की वास्तविक स्थिति में दिखाई दे रहे अंतर को दूर करने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।






