‘हेरिटेज टू डेवलपमेंट’ का मोहन मॉडल ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’
18 नवंबर को मंदसौर जिले के गांधीसागर में होगी मप्र सरकार की 9वीं डेस्टिनेशन कैबिनेट
स्लग—गांव,गौरव, विरासत और विकास का नया संगम बनकर उभरीं डॉ मोहन यादव की डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकें
बोल्ड लाइन
जबलपुर से जगदीशपुर तक आठ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर कैबिनेट बैठकें, अब 18 नवंबर को गांधीसागर में होगी नौवीं बैठक..किसान कल्याण,औद्योगिक निवेश, युवा अवसर और प्राकृतिक पर्यटन पर रहेगा फोकस
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठकों की परंपरागत कार्यप्रणाली को एक नया आयाम देते हुए शासन और प्रशासन को मंत्रालय की चारदीवारी से बाहर निकालकर प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, जनजातीय और पर्यटन महत्व वाले स्थानों तक पहुंचाने का अभिनव प्रयोग किया है। इस पहल को ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’ नाम दिया गया। इसका उद्देश्य केवल अलग-अलग स्थानों पर मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित करना नहीं, बल्कि उन स्थानों के इतिहास, गौरवशाली विरासत, महापुरुषों और बलिदानियों को नई पहचान देना तथा स्थानीय विकास को नीतिगत फैसलों से जोड़ना भी है।
इस पहल के जरिए सरकार ने ‘विरासत से विकास’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। अब तक प्रदेश के आठ अलग-अलग स्थानों पर ऐसी बैठकें हो चुकी हैं। हर स्थान का चयन उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक अथवा भौगोलिक विशेषता को ध्यान में रखकर किया गया। इन बैठकों में जहां स्थानीय गौरव और इतिहास को याद किया गया, वहीं प्रदेश के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले भी लिए गए। अब 18 नवंबर को गांधीसागर में प्रस्तावित नौवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट इस सिलसिले को आगे बढ़ाएगी। इसमें किसान कल्याण, औद्योगिक निवेश और प्राकृतिक पर्यटन के साथ आने वाले युवा वर्ष की प्राथमिकताओं को जोड़कर देखने की तैयारी है।
रानी दुर्गावती से अहिल्याबाई तक सुशासन की राह
डेस्टिनेशन कैबिनेट की शुरुआत 3 जनवरी 2024 को जबलपुर से हुई। इसके बाद 5 अक्टूबर 2024 को दमोह जिले के सिंग्रामपुर में बैठक आयोजित की गई, जिसे वीरांगना रानी दुर्गावती को समर्पित किया गया। सिंग्रामपुर रानी दुर्गावती के शासनकाल से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है। इस आयोजन के माध्यम से उनके शौर्य, सुशासन और बलिदान की स्मृतियों को व्यापक पहचान देने का प्रयास हुआ।
शराबबंदी से मेट्रोपॉलिटन तक
24 जनवरी 2025 को महेश्वर के ऐतिहासिक किले में हुई बैठक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर को समर्पित रही। इसी बैठक में धार्मिक नगरों में शराबबंदी का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके बाद 20 मई 2025 को इंदौर के राजवाड़ा में अहिल्याबाई की 300वीं जयंती के अवसर पर कैबिनेट बैठक हुई। इस दौरान भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन के लिए मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के गठन का निर्णय लिया गया। इस तरह ऐतिहासिक धरोहर के बीच भविष्य के शहरी विकास की योजना को भी मंच मिला।
शौर्य को सम्मान,बुंदेलखंड विकास
3 जून 2025 को पचमढ़ी में हुई बैठक राजा भभूत सिंह के शौर्य और बलिदान को समर्पित रही। पचमढ़ी वन्यजीव अभ्यारण्य का नाम बदलकर ‘राजा भभूत सिंह पचमढ़ी अभ्यारण्य’ किया गया तो कई विकास योजनाओं पर मुहर लगाई गई.वहीं 9 दिसंबर 2025 को विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में कैबिनेट बैठक आयोजित कर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को पर्यटन से जोड़ने का संदेश दिया गया। बुंदेलखंड के विकास और क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख निर्णय लिए गए। सागर–दमोह सड़क परियोजना,मसवानी ग्रांट औद्योगिक क्षेत्र को विशेष पैकेज,सागर–दमोह सड़क परियोजना,चीता प्रोजेक्ट (नौरादेही) जैसे निर्णय शामिल रहे.
नागलवाड़ी..किसान कल्याण पर जोर
2 मार्च 2026 को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में आयोजित सातवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट ने इस पहल को एक नया स्वरूप दिया। बाबा भिलट देव महाराज की तपोभूमि पर हुई यह बैठक किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि कैबिनेट भी थी। इसमें कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, सहकारिता और नर्मदा घाटी विकास से संबंधित 16 योजनाओं के लिए 27,746 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। आदिवासी बहुल क्षेत्र में कृषि आधारित रोजगार, स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, आधुनिक मंडियों और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के फैसले लिए गए। यह बैठक इस बात का उदाहरण बनी कि डेस्टिनेशन कैबिनेट केवल विरासत को याद करने का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र की जरूरतों के मुताबिक विकास का रोडमैप तैयार करने का मंच भी बन सकती है।
जगदीशपुर में 8वीं बैठक,यूसीसी को मंजूरी
19 जुलाई 2026 को भोपाल के निकट ऐतिहासिक जगदीशपुर (पूर्व नाम इस्लामनगर) में आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट आयोजित हुई। इस बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। इसके अलावा अन्य विधायी और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी निर्णय हुए। इस तरह ऐतिहासिक महल और विरासत के बीच हुई बैठक में प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया गया।
गांधीसागर में नौवीं कैबिनेट,नए एजेंडे पर नजर
अब 18 नवंबर को गांधीसागर में प्रस्तावित नौवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट इस पूरी श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। इस बैठक में किसान कल्याण वर्ष और उद्योग वर्ष को ध्यान में रखते हुए कृषि एवं औद्योगिक विकास से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।
गांधीसागर क्षेत्र में जल संसाधन, ऊर्जा, पर्यटन और औद्योगिक निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसे में यहां होने वाले नीतिगत फैसले क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे सकते हैं। विशेष रूप से प्राकृतिक पर्यटन, जल पर्यटन, नवकरणीय उर्जा,स्थानीय रोजगार और निवेश के अवसरों को एक साथ जोड़ने की संभावनाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। आने वाले युवा वर्ष की प्राथमिकताओं को देखते हुए युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर भी इस विकास दृष्टि का हिस्सा बन सकते हैं।
कुल मिलाकर..जबलपुर से शुरू हुआ डेस्टिनेशन कैबिनेट का यह सफर अब गांधीसागर पहुंच रहा है। अब देखना होगा कि नौवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट किसान कल्याण, औद्योगिक निवेश और पर्यटन के क्षेत्र में कौन-से नए निर्णय लेकर आती है। और ‘विरासत से विकास’ की यह अवधारणा स्थायी विकास, रोजगार और स्थानीय लोगों की आर्थिक समृद्धि को किस तरीके से साथ आगे बढ़ती है.




