जीएसटी रिटर्न में स्वत: दर्ज होंगी ई-वे बिल की सूचनाएं

नई दिल्ली । व्यापारियों को जीएसटीआर-1 मासिक रिटर्न भरते समय 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य की वस्तुओं की सप्लाई के लिए जारी हुए ई-वे बिल का विवरण स्वत: तर्ज करने का विकल्प मिलेगा। माना जा रहा है कि सप्लाई के बारे में गलत जानकारी देकर होने वाली कर चोरी रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

कर विशेषज्ञों के अनुसार कर अधिकारियों का इसका आकलन करने में आसानी होगी कि जीएसटीआर-1 में दिए बिक्री विवरण के अनुसार माल की सप्लाई करके समुचित कर का भुगतान किया गया है या अथवा नहीं। जीएसटी नेटवर्क का कहा है कि आंकड़े फीड करने से बचाने के लिए करदाताओं को यह सुविधा दी गई है। ई-वे बिल का डाटा उसी फॉर्मेट में है जिस फॉर्मेट की जीएसटीआर-1 रिटर्न में आवश्यकता होती है। करदाता जीएसटीआर-1 रिटर्न में ई-वे बिल का डाटा वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। वे चाहें तो यह डाटा लेकर ऑफलाइन टूल से भी जीएसटीआर-1 रिटर्न भर सकते हैं।

ई-वे बिल पूरे देश में लागू होने के बाद जांच अधिकारियों को पता चला कि कुछ ट्रांसपोर्टर एक ई-वे बिल लेकर कई चक्कर लगा रहे हैं और माल की सप्लाई कर रहे हैं। कई लोग बिना ई-वे बिल जेनरेट किए ही माल की सप्लाई कर रहे हैं। कई लोग ई-वे बिल का विवरण अपने रिटर्न में नहीं दे रहे हैं।

ई-वे बिल जेनरेट करते समय इसके पोर्टल पर सप्लायर, प्राप्तकर्ता, इन्वॉयस नंबर, तारीख, मात्र वगैरह की पूरी जानकारी देनी होती है। यह जानकारी अब जीएसटी पोर्टल पर ट्रांसफर होगी। इससे करदाताओं को सभी इन्वॉयस की जानकारी जीएसटीआर-1 फार्म में फीड नहीं करनी होगी। ई-वे बिल में दी गई जानकारी स्वत: ही फार्म में लोड हो जाएगी।

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