मध्य प्रदेश में कमलनाथ के ‘टारगेट’ पर बीजेपी के ‘मैनेजर्स’

मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी सरकार ने मध्य प्रदेश में बीजेपी के ‘मैनेजर्स’ पर निशाना साधने का सिलसिला तेज़ कर दिया है। शिवराज सरकार के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक नरोत्तम मिश्रा पर शिकंजा कसते हुए ई-टेडरिंग घोटाले की जाँच में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने मिश्रा के दो पुराने स्टाफ़र्स के यहाँ न केवल रेड की बल्कि उन्हें गिरफ़्तार कर जेल भिजवा दिया है। मिश्रा को विरोधी दलों में ‘तोड़फोड़’ का उस्ताद माना जाता है। सरकार के निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी हैं। उनकी भी कई ‘फ़ाइलें’ सरकार ने खोल दी हैं।

मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस एवं प्रतिपक्ष बीजेपी के बीच चल रही समूची रस्साकशी को गोवा और कर्नाटक प्रकरण की जवाबी कार्रवाई क़रार दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सदस्य हैं। फिलहाल एक सीट रिक्त है। कुल 229 सीटों में कांग्रेस के पास 114 और बीजेपी के पास 108 सीटें हैं। चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा का सदस्य है। कांग्रेस की सरकार इनके समर्थन से चल रही है। बहुमत के लिए 116 विधायक होने ज़रूरी हैं।

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