मुरैना के पूर्व डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को हाई कोर्ट से राहत, 5 महीने बाद मिली जमानत

By: Ravindra Singh

मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना में दुष्कर्म के आरोप में करीब पांच महीने से जेल में बंद तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से राहत मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया है। इससे पहले निचली अदालत में उनकी जमानत याचिका खारिज हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की थी।

युवती की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला

पुलिस के अनुसार, मुरैना निवासी 32 वर्षीय युवती ने 2 जून 2026 को सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। युवती का आरोप था कि वर्ष 2025 में फेसबुक के जरिए उसकी पहचान तत्कालीन एसडीएम अरविंद माहौर से हुई थी। उस समय माहौर सबलगढ़ में पदस्थ थे।

शिकायत में युवती ने आरोप लगाया था कि माहौर ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। युवती ने 30 जून 2025 की एक घटना का भी जिक्र किया था। उसके मुताबिक, उसे घुमाने के बहाने सर्किट हाउस के पीछे ले जाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की थी।

सरकारी आवास और ग्वालियर के फ्लैट को लेकर भी आरोप

शिकायत के मुताबिक, युवती ने सर्किट हाउस के पीछे हुई कथित घटना के अलावा सरकारी आवास और ग्वालियर स्थित एक फ्लैट में भी दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया था। उसने यह भी दावा किया था कि शादी के बदले उससे पांच करोड़ रुपये की मांग की गई और एक महीने तक किसी अन्य युवक के साथ रहने की शर्त रखी गई थी।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए अरविंद माहौर को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुरैना सब जेल भेजा गया। करीब डेढ़ महीने तक वहां रहने के बाद उन्हें ग्वालियर सेंट्रल जेल स्थानांतरित कर दिया गया था।

निचली अदालत से राहत नहीं मिलने पर हाई कोर्ट पहुंचे

गिरफ्तारी के बाद से अरविंद माहौर जेल में बंद थे। निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली और 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर दी।

हाई कोर्ट के इस फैसले से उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, जमानत मिलना आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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