By: Ravindra Singh
मध्य प्रदेश में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए भोपाल, इंदौर और उज्जैन के आसपास नए मिनी शहर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इन प्रस्तावित शहरों में आवास, बाजार, स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के साथ रोजगार और कारोबार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार का उद्देश्य ऐसे सुनियोजित विकास क्षेत्र तैयार करना है, जहां लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर-दराज के इलाकों में न जाना पड़े। इन नए क्षेत्रों का आकार लगभग 900 से 1100 एकड़ के बीच हो सकता है। फिलहाल जमीन की पहचान, सर्वे और योजना तैयार करने का काम चल रहा है। उम्मीद है कि अगले दो महीने में प्रस्तावित स्थानों और उनके क्षेत्रफल को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।
भोपाल, इंदौर और उज्जैन के आसपास विकसित होंगे नए शहर
मध्य प्रदेश सरकार भोपाल रिंग रोड के पूर्वी और पश्चिमी बायपास, इंदौर-उज्जैन मार्ग और उज्जैन-जावरा एक्सप्रेस लिंक के आसपास नए विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इन क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त छोटे शहरों के रूप में तैयार करने का प्रस्ताव है।
योजना के तहत आवासीय कॉलोनियों के साथ बाजार, स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए भी जगह निर्धारित की जाएगी। इसके अलावा, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं।
इंदौर और उज्जैन के बीच प्रस्तावित 48 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पर 10 संभावित स्थान चिह्नित किए गए हैं। वहीं, उज्जैन-जावरा मार्ग पर भी दो स्थानों की पहचान की गई है। भोपाल रिंग रोड के आसपास भी नए विकास क्षेत्रों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशने का काम जारी है। हालांकि, इन सभी स्थानों की अंतिम सीमाएं सर्वे पूरा होने के बाद तय होंगी।
युवाओं को रोजगार और कारोबार के मिल सकते हैं नए अवसर
प्रस्तावित मिनी शहरों को विकसित करने का मकसद केवल आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है। योजना में उद्योग, आईटी सेक्टर, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य रोजगार आधारित गतिविधियों के लिए जगह निर्धारित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इन क्षेत्रों में उद्योगों और कारोबार के विस्तार से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही, व्यापार शुरू करने वाले लोगों को भी बेहतर बुनियादी सुविधाओं और नए बाजारों का लाभ मिल सकता है।
नए विकास क्षेत्रों के लिए अलग मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग के लिए जमीन निर्धारित करने के साथ भवन निर्माण के नियम भी तय किए जाएंगे। इससे अनियोजित निर्माण, अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है।
सर्वे के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट, दो महीने में तय होगी जगह
इस योजना को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) को सौंपी गई है। निगम ने सर्वे और प्लानिंग के लिए दो कंसल्टेंसी फर्मों को काम दिया है। भोपाल रिंग रोड से जुड़े प्रस्तावित विकास क्षेत्रों का सर्वे इंटर-कॉन्टिनेंटल कंसल्टेंट्स एंड टेक्नोक्रेट्स प्राइवेट लिमिटेड (ICTC) करेगी। वहीं, इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा मार्ग के लिए डिजाइन पॉइंट को जिम्मेदारी दी गई है।
दोनों कंसल्टेंसी फर्मों के सर्वे और योजना निर्माण के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इनके माध्यम से जमीन की उपलब्धता, संभावित विकास क्षेत्रों की सीमाओं और लैंड पूलिंग जैसे पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह के मुताबिक, एमपीआरडीसी को इस संबंध में जिम्मेदारी दी जा चुकी है और प्रस्तावित विकास क्षेत्रों के स्थान निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अगले दो महीने में सर्वे के आधार पर नए शहरों के संभावित स्थान और उनके दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
फिलहाल इन मिनी शहरों के निर्माण की शुरुआत और परियोजना पूरी होने की निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है। हालांकि, योजना लागू होने पर लोगों को रहने के नए विकल्प मिल सकते हैं और रोजगार तथा कारोबार के अवसरों में भी वृद्धि होने की संभावना है।




