जीवनखेड़ी स्थित मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 400 फीट लंबी चुनरी माता को अर्पित
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में करवा चौथ का पर्व विशेष आस्था और परंपरा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जीवनखेड़ी गांव में क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित चौथ माता मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इस मंदिर की खासियत है कि यहां साल में केवल एक बार, करवा चौथ के दिन ही माता के दर्शन का अवसर मिलता है। मंदिर के पट खुलते ही सुबह से महिलाओं और श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना
करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर चौथ माता के दरबार में पहुंचीं। इस अवसर पर माता का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
मंदिर में चौथ माता के साथ माता पार्वती, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और संतोषी माता की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की।
400 फीट लंबी चुनरी अर्पित, भगवान मनु-शतरूपा की प्राण-प्रतिष्ठा
मंदिर के संस्थापक डॉ. कैलाश नागवंशी के मुताबिक, करवा चौथ के अवसर पर दोपहर 12 बजे भगवान मनु-शतरूपा की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं, शाम 4 बजे दुबई से लाई गई करीब 400 फीट लंबी चुनरी माता को अर्पित की गई।
इसके अलावा शाम 7 बजे क्षिप्रा तट पर विशेष शिप्रा आरती का आयोजन भी निर्धारित किया गया। इन धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला।
सिंदूर, सिक्के और नेपाल के रुद्राक्ष का प्रसाद
चौथ माता मंदिर में प्रसाद के रूप में सिंदूर, सिक्के और नेपाल के रुद्राक्ष देने की विशेष परंपरा है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्रद्धालु इन वस्तुओं को सुख-समृद्धि और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में अपने घर ले जाते हैं। करवा चौथ के अवसर पर इस परंपरा के प्रति महिलाओं में विशेष श्रद्धा देखने को मिली।
श्रद्धालुओं ने साझा किए अपने अनुभव
मंदिर में दर्शन करने पहुंचीं महिलाओं ने बताया कि वे कई वर्षों से करवा चौथ पर माता के दर्शन करने आती हैं। एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे के विवाह के लिए माता से मनोकामना मांगी थी, जो उनके अनुसार माता की कृपा से पूरी हुई। श्रद्धालुओं ने मंदिर के प्रति अपनी आस्था और विश्वास व्यक्त किया।
बताया गया कि चौथ माता मंदिर की स्थापना करीब 26 वर्ष पहले हुई थी। स्थापना के बाद से ही यहां करवा चौथ के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। साल में केवल एक दिन पट खुलने की परंपरा के चलते इस अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे।




