By: Ravindra Singh
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में प्रशासनिक और संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार मंत्रियों को आवंटित प्रभारी जिलों में फेरबदल की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर 2026 के पहले पखवाड़े में नई व्यवस्था लागू हो सकती है। वहीं, मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर फैसला नए साल में होने की संभावना है।
सरकार का उद्देश्य मंत्रियों के गृह जिलों और प्रभार वाले जिलों के बीच की दूरी कम करना है, ताकि वे अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में नियमित दौरे कर सकें और स्थानीय स्तर पर संगठन तथा प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय बना सकें।
तीन प्रस्तावों में से सिर्फ जिला प्रभार बदलने को मंजूरी
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय संगठन को तीन प्रस्ताव भेजे गए थे। इनमें मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों के विभागों में फेरबदल और प्रभारी जिलों में बदलाव शामिल थे। फिलहाल केंद्रीय नेतृत्व ने केवल प्रभारी जिलों के पुनर्गठन को मंजूरी दी है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास मंत्रियों के पिछले एक साल के कामकाज की रिपोर्ट भी उपलब्ध है। ऐसे में नए जिलों का आवंटन करते समय मंत्रियों के प्रदर्शन, उनके गृह जिले से दूरी और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखा जा सकता है।
पार्टी संगठन भी इस प्रक्रिया की तैयारी में जुटा है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि किस मंत्री को कौन-सा जिला सौंपा जाएगा।
कई मंत्रियों को तय प्रभार वाले जिलों तक पहुंचने में तय करना पड़ता है लंबा सफर
वर्तमान व्यवस्था में कई मंत्रियों के गृह जिले और प्रभारी जिलों के बीच काफी दूरी है। इस कारण नियमित दौरे और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बनाए रखने में परेशानी होने की बात सामने आई है।
प्रमुख मंत्रियों के मौजूदा प्रभार वाले जिलों और दूरी से जुड़े कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:
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कैलाश विजयवर्गीय: धार और सतना के प्रभारी मंत्री हैं। इंदौर से सतना की दूरी लगभग 650 किलोमीटर बताई गई है।
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संपतिया उइके: आलीराजपुर और सिंगरौली का प्रभार है। मंडला से आलीराजपुर की दूरी करीब 761 किलोमीटर है।
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करण सिंह वर्मा: मुरैना और सिवनी के प्रभारी हैं। सीहोर से मुरैना लगभग 452 किलोमीटर और सिवनी करीब 416 किलोमीटर दूर है।
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नागर सिंह चौहान: उमरिया और आगर मालवा की जिम्मेदारी है। आलीराजपुर से उमरिया की दूरी करीब 887 किलोमीटर है।
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प्रद्युम्न सिंह तोमर: पांढुर्णा और शिवपुरी के प्रभारी हैं। ग्वालियर से पांढुर्णा की दूरी लगभग 675 किलोमीटर है।
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प्रहलाद पटेल: भिंड और रीवा का प्रभार है। नरसिंहपुर से भिंड करीब 527 किलोमीटर और रीवा लगभग 280 किलोमीटर दूर है।
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डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल: सागर और शहडोल के प्रभारी हैं। रीवा से सागर की दूरी लगभग 335 किलोमीटर है।
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डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा: देवास और जबलपुर के प्रभारी हैं। मंदसौर से जबलपुर की दूरी करीब 650 किलोमीटर बताई गई है।
प्रस्तावित बदलाव के जरिए इन दूरियों को कम करने और मंत्रियों के लिए प्रभार वाले जिलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की कोशिश की जा सकती है।
मंत्रियों के दौरे और कार्यकर्ताओं से संपर्क को लेकर भी नाराजगी
प्रभारी जिलों में फेरबदल की चर्चा के पीछे पार्टी संगठन तक पहुंची शिकायतों को भी एक वजह माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों के नियमित दौरे नहीं करने और जिलों में पर्याप्त समय नहीं बिताने को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है।
यह शिकायत भी की गई है कि कुछ मंत्री जिलों में रात्रि विश्राम नहीं करते और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मेल-मिलाप की गतिविधियां पहले की तुलना में कम हो गई हैं। इस संबंध में प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी तक भी जानकारी पहुंचने की बात कही गई है।
फिलहाल सरकार की प्राथमिकता प्रभारी जिलों का पुनर्गठन करना है। सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर के पहले 15 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है। इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों में बदलाव को लेकर नए साल में चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय और नए जिलों की सूची की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।






