प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति का फैसला, GRSE और गोवा शिपयार्ड करेंगे निर्माण
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट यानी युद्धपोत बनाने की 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इन युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा किया जाएगा।
2 हजार टन वजन और 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार
अगली पीढ़ी के ये आठ युद्धपोत लगभग 2 हजार टन वजनी होंगे। इनकी अधिकतम रफ्तार करीब 30 नॉट्स यानी लगभग 55 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इन्हें भारतीय नौसेना द्वारा विकसित नए स्टेल्थ डिजाइन के आधार पर तैयार किया जाएगा। स्टेल्थ तकनीक की मदद से इन युद्धपोतों को दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचाने में मदद मिलेगी।
इन युद्धपोतों को समुद्री सुरक्षा के अलग-अलग अभियानों के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों, पनडुब्बियों और हवाई हमलों से निपटने की क्षमता होगी। इसके अलावा ये तटीय सुरक्षा, समुद्री गश्त और खोज एवं बचाव अभियानों में भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का होगा इस्तेमाल
इस परियोजना में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे देश में रक्षा उपकरणों और युद्धपोतों के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल और सागर यानी ‘सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
हजारों लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना का काम GRSE और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के बीच बांटा जाएगा। इससे दोनों सरकारी शिपयार्ड को लंबे समय तक काम मिलने की उम्मीद है। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों को भी फायदा हो सकता है। परियोजना से हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
2030 तक पहले युद्धपोत की डिलीवरी का लक्ष्य
जानकारी के मुताबिक, पहले युद्धपोत का निर्माण एक साल के भीतर शुरू होने की संभावना है। इसे वर्ष 2030 तक नौसेना को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन युद्धपोतों की डिलीवरी अगले चार से पांच वर्षों में शुरू होने की उम्मीद है।
हिंद महासागर में नौसेना की क्षमता बढ़ाने की तैयारी
यह परियोजना ऐसे समय में मंजूर हुई है, जब भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों के बीच अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर रही है। चीन की बढ़ती मौजूदगी को भी इस क्षेत्र की प्रमुख रणनीतिक चुनौतियों में शामिल किया जाता है।
यह मंजूरी नौसेना के मौजूदा युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत नीलगिरि श्रेणी के फ्रिगेट, अगली पीढ़ी के विध्वंसक और बेड़े को सहायता देने वाले जहाजों का निर्माण भी शामिल है।
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए 2.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी।




