7 शहर..रीजनल से ग्लोबल मंच..औद्योगिक मप्र का नया ‘अभ्युदय’

7 शहर..रीजनल से ग्लोबल मंच..औद्योगिक मप्र का नया अभ्युदय

विकसित मध्यप्रदेश की परिकल्पना..क्षेत्रीय उद्योग, स्थानीय संसाधन और रोजगार विकास के प्रमुख आधार..तैयारी GIS 2027 की

मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में वर्ष 2024-25 एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में सामने आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने की रणनीति को केवल राजधानी तक सीमित रखने के बजाय संभागीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया। उज्जैन से शुरू हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की श्रृंखला जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम और शहडोल तक पहुंची। इसके बाद 24 और 25 फरवरी 2025 को भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने प्रदेश के औद्योगिक अवसरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया।

इस पूरी पहल के केंद्र में एक व्यापक आर्थिक सोच दिखाई देती है..मध्यप्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की क्षमताओं को पहचानना, स्थानीय संसाधनों को उद्योगों से जोड़ना, निवेश को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना और रोजगार के नए अवसर विकसित करना। इसे मुख्यमंत्री की ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ की परिकल्पना से जोड़कर देखें तो औद्योगिकीकरण केवल बड़े निवेश का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास, स्थानीय उद्यमिता और आर्थिक अवसरों के विस्तार का माध्यम भी है।

 

7 क्षेत्रों की औद्योगिक संभावनाएं

मार्च 2024 से जनवरी 2025 के बीच प्रदेश के सात संभागीय केंद्रों में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव ने निवेश को स्थानीय जरूरतों और संसाधनों से जोड़ने का मंच उपलब्ध कराया। हर क्षेत्र के लिए अलग औद्योगिक संभावनाओं पर जोर दिया गया।

उज्जैन में 1-2 मार्च 2024 को आयोजित पहले कॉन्क्लेव में करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और लगभग एक लाख रोजगार अवसरों की संभावना सामने आई। अदाणी समूह ने 75 हजार करोड़ रुपये के निवेश की योजना बताई, जबकि पेप्सिको ने विक्रम उद्योगपुरी में 1,250 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा। खाद्य प्रसंस्करण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के साथ उज्जैन को औद्योगिक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं सामने आईं।

जबलपुर में 20 जुलाई 2024 को आयोजित कॉन्क्लेव में रक्षा उत्पादन, वाहन निर्माण, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल और खनिज क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, करीब 22 हजार करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी 67 औद्योगिक इकाइयों के वर्चुअल लोकार्पण और लगभग 13,400 रोजगार अवसरों की जानकारी दी गई। अशोक लेलैंड और आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड के बीच 600 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा समझौता रक्षा और वाहन निर्माण क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं का उदाहरण बना।

ग्वालियर में 28 अगस्त 2024 को हुए आयोजन में आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव और करीब 35 हजार रोजगार अवसरों की संभावना बताई गई। अदाणी समूह की 3,500 करोड़ रुपये की निवेश योजना में सीमेंट, रक्षा क्षेत्र और जैकेट निर्माण जैसी गतिविधियां शामिल थीं। इसके साथ औद्योगिक पार्कों के विकास पर भी जोर दिया गया।

27 सितंबर 2024 को सागर में आयोजित कॉन्क्लेव में लगभग 23,181 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 27,375 रोजगार अवसरों की संभावना सामने आई। बुंदेलखंड में औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि आवंटन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में पहल की गई।
23 अक्टूबर 2024 को रीवा में आयोजित कॉन्क्लेव में 30,814 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 27,645 रोजगार अवसरों की संभावना जताई गई। आईटी पार्क, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, खनन, पर्यटन, कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और कुटीर उद्योगों को विकास की रणनीति से जोड़ने का प्रयास हुआ।

7 दिसंबर 2024 को नर्मदापुरम में आयोजित छठे कॉन्क्लेव में करीब 31,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 40,543 रोजगार अवसरों की संभावना बताई गई। मोहासा-बाबई सोलर एनर्जी पार्क के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा आधारित औद्योगिक विकास को विशेष महत्व मिला।

16 जनवरी 2025 को शहडोल में आयोजित सातवें कॉन्क्लेव में 32,520 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 30,925 रोजगार अवसरों की संभावना सामने आई। यहां खनिज संसाधनों, ऊर्जा और स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर जोर रहा। टोरेंट पावर की 18 हजार करोड़ रुपये की निवेश योजना भी प्रमुख प्रस्तावों में शामिल थी।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025

क्षेत्रीय कॉन्क्लेव के बाद भोपाल में 24,25 फरवरी 2025 आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक रणनीति को व्यापक मंच दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी को समिट का उद्घाटन किया। आयोजन में फार्मा एवं मेडिकल डिवाइस, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, पर्यटन और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों पर विशेष सत्र आयोजित हुए। ऑटो शो, टेक्सटाइल एवं फैशन एक्सपो और ‘एक जिला-एक उत्पाद’ प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। समिट के निवेश आंकड़ों में भी एक महत्वपूर्ण अंतर ध्यान देने योग्य है। उपलब्ध विवरण में ₹26.61 लाख करोड़ के समझौता ज्ञापनों का उल्लेख है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 25 फरवरी 2025 को समापन समारोह में दो दिवसीय समिट के दौरान कुल ₹30.77 लाख करोड़ के एमओयू होने की जानकारी दी थी। इसलिए समिट के आधिकारिक समापन आंकड़े के रूप में ₹30.77 लाख करोड़ का उल्लेख अधिक उपयुक्त है।

अभ्युदय मध्यप्रदेश का अगला चरण
डॉ. मोहन यादव की विकसित मध्यप्रदेश की परिकल्पना को औद्योगिक आकार देने की इस रणनीति का अगला चरण निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उद्योगों का विस्तार तभी व्यापक आर्थिक बदलाव ला सकेगा, जब बड़े उद्योगों के साथ स्थानीय एमएसएमई, छोटे उद्यमियों, आपूर्तिकर्ताओं और कौशल आधारित रोजगार को भी बढ़ावा मिले। अभ्युदय मध्यप्रदेश का औद्योगिक अर्थ यही है कि निवेश की घोषणा से आगे बढ़कर उत्पादन, रोजगार, उद्यमिता और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के ठोस परिणाम सामने आएं। अब एक बार फिर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 की तैयारी जोरों पर है..और सरकार,सीएम डॉ मोहन यादव को भरोसा है कि यह आयोजन मप्र की आर्थिक उन्नति में मील करपत्थर साबित होगा.

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