SIR पर चुनाव आयोग एकमत, अब सुप्रीम कोर्ट में पारदर्शिता और प्रक्रिया की परीक्षा!

तीनों आयुक्तों की सहमति का दावा, फॉर्म-6 में बदलाव से इनकार; मतदाताओं के अधिकारों पर आयोग ने दी सफाई

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सामूहिक निर्णय और प्रशासनिक पारदर्शिता का पक्ष रखा है। सोमवार को दाखिल हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया कि जून 2025 से मई 2026 तक SIR संबंधी तीनों प्रमुख फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए।

आयोग का महत्वपूर्ण तर्क है कि फाइलों पर दर्ज असहमति, सवाल या सुझाव अंतिम निर्णय से असहमति का प्रमाण नहीं हैं। तीनों आयुक्तों के हस्ताक्षर वाला हलफनामा इसी दावे को मजबूत करने के लिए प्रस्तुत किया गया है।

फॉर्म-6 विवाद में आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित मतदाता पंजीकरण फॉर्म में संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार को है। SIR के लिए मांगा गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र अलग दस्तावेज है।

मतदाताओं के लिए अहम राहत यह है कि पुरानी सूची से नाम नहीं मिलने पर बूथ लेवल अधिकारी घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। प्रत्येक मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना अनिवार्य नहीं होगा।

तकनीकी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए IIT मद्रास और IISc बेंगलुरु के विशेषज्ञ ECINet की जांच करेंगे। वहीं, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम अधिकार सक्षम निर्वाचन अधिकारी के पास रहेगा।

अब 27 अक्टूबर की सुनवाई में आयोग की प्रक्रियागत वैधता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण होंगे।

  • Related Posts

    सऊदी में फंसे मप्र सहित देश के 4 हजार भारतीय

    —MP के 300 से ज्यादा शामिल,भोपाल-इंदौर के 120 करीब लोगों की वापसी अटकी —सैन्य तनाव और सुरक्षा कारणों से उड़ानें रद्द,रोजाना हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च मिडिल ईस्ट में बढ़ते…

    भोपाल शराब ठेका मामला: 2.75 करोड़ की कथित फर्जी FDR से टेंडर लेने का आरोप, लोकायुक्त जांच में जुटा

    By: Ravindra Singh भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब दुकान का ठेका हासिल करने के लिए करीब 2.75 करोड़ रुपये की कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) जमा…

    Leave a Reply